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टिड्डी दल के सम्बंध में जारी चेतावनी एवं सलाह

टिड्डियों की गणना कृषि जगत के सर्वाधिक संहारक कीटों में होती है। ये सर्वाहारी होते हैं तथा छोटे, मध्यम या बड़े झुंडों में रहकर सभी प्रकार की हरी वनस्पतियों को खाकर नष्ट कर देते हैं। ये ओर्थोप्टेरा गण के कीट हैं जिनमें भारत में प्रचलित टिड्डियों के नाम प्रवासी टिड्डी, ट्री टिड्डी, बम्बई टिड्डी, मरुस्थली टिड्डी आदि हैं। इनमें मरुस्थली टिड्डी सर्वाधिक हानिकारक है। इस वर्ष ये टिड्डी दल ईरान से पाकिस्तान होते हुये गुजरात तथा राजस्थान के रास्ते भारत में प्रवेश करके क्षति पहुंचा रहे हैं। वर्तमान में ये उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर आगरा की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके पश्चात इसके बरेली मण्डल की तरफ बढ्ने

लॉकडाउन में गन्ने की फसल पर एक साथ तीन कीटों का खतरा

लॉकडाउन में गन्ने की फसल पर एक साथ तीन कीटों का खतरा

लॉकडाउन के बीच गन्ने की फसल पर कीटों के हमले का खतरा बढ़ गया है। गन्ना किसान एक साथ तीन कीटों का मुकाबले की तैयारियां कर रहे हैं। हालांकि अभी तक जिले में इन कीटों का प्रकोप शुरू नहीं हुआ है। मगर विभाग की ओर से एहतियात के तौर पर बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।

ककोड़ा की खेती

ककोड़ा या कर्कोट एक सब्जी है। इसका फल छोटे करेले से मिलता-जुलता होता है जिसपर छोटे-छोटे कांटेदार रेशे होते हैं। राजस्थान में इसे किंकोड़ा भी कहते हैं |इस सब्जी में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होने के साथ-साथ ये काफी स्वादिष्ट भी बताया जाता है। यह सब्जी से कैंसर और हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारियां भी काफी हद तक कम हो जाती हैं।
ककोड़ा की सब्जी पौष्टिक गुणों से मालामाल होता है। ककोड़ा के हरे रंग वाले फलों की सब्जी बनाई जाती है, जिसमें 9-10 कड़े बीज होते हैं।
जलवायु

सूक्ष्म जीवों से ही सम्भव है मृदा सुधार

आधुनिक समय में हमारे पर्यावरण में असंतुलन पैदा हो गया है। हमारी मृदा, जल, वायु व वन सभी प्रदूषित हो रहे हैं। जिसके कारण जैव-विविधता के लिए संकट, बाढ़, सूखा व अन्य प्राकृतिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इस कारण अब समय यह चेतावनी दे रहा है कि हमें प्राकृतिक स्रोतों की शुद्धता बनाए रखने के लिए प्रयास करना होगा। प्राकृतिक स्रोतों की शुद्धता बनाए रखने में सूक्ष्म जीवों का कितना बड़ा योगदान है ? बता रहे हैं, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के डॉ. खलील खान एवं डॉ.

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