कृषि अपशिष्ट के कार्बनिक पदार्थ को जलाने से हवा जहरीली

 कृषि अपशिष्ट के कार्बनिक पदार्थ को  जलाने से हवा जहरीली

सर्दियां शुरू होने के साथ ही उत्तर भारत को अकसर हर साल भारी परेशानी उठानी पड़ती है क्योंकि 20 करोड़ से ज्यादा निवासियों वाले इस क्षेत्र की हवा जहरीली हो जाती है. हवा में घुले इस जहर की वजहों की बात आती है तो अक्सर उंगलियां उन हाथों की ओर उठती हैं, जो देशभर के लोगों का पेट भरते हैं.
देश का अन्न भंडार कहलाने वाले क्षेत्र के किसानों को कृर्षि अपशिष्ट खेतों में न जलाने के लिए कहा जाता है क्योंकि इससे नयी दिल्ली, लखनऊ और इलाहाबाद जैसे बड़े शहरों की हवा दूषित हो जाती है.

तंबाकू की खेती

किसानों के लिए नकदी फसलें कम लागत व कम समय में ज्यादा लाभ देने वाली मानी जाती हैं. नकदी फसलों की प्रोसेसिंग व मार्केटिंग के बारे में जानकारी ले कर किसान अच्छा फायदा ले सकते हैं. इन्हीं नकदी फसलों में तंबाकू की खेती खास है. तंबाकू की खेती न केवल कम समय में की जाती है, बल्कि इस के मामले में किसानों को मार्केटिंग के लिए इधरउधर भटकना नहीं पड़ता है. तंबाकू की फसल की कटाई व प्रोसेसिंग के बाद किसान के खेत से ही फसल की बिक्री आसानी से हो जाती है. भारत में तंबाकू की कई किस्में उगाई जाती हैं. किन किस्मों को उगाना है, यह उस के अलगअलग इस्तेमाल पर निर्भर करता है.

भारतीय कृषि - समस्या और समाधान

"भारत एक कृषि प्रधान देश है "  अक्सर कृषि लेखों (Essays on Agriculture) की शुरुआत इसी वाक्य से होती है. ग्रंथों में कहा गया है  "अन्नम वै प्राणिनां प्राणः "( अन्न प्राणियों का जीवन है अर्थात प्राण है।  प्राण ही जीवन एवं जीवन ही प्राण होता है।  प्राण नहीं तो जीवन नहीं। ) और हमसब इस तथ्य से भली भांति परिचित हैं। अन्न को उगाने की कला का नाम ही कृषि है. कृषि एक विज्ञान है जिसमे फसल को उगाने से लेकर उसके बाज़ारीकरण तक का सूक्ष्म ज्ञान निहित है.

चने की खेती के लिए किसान अपनाए रेज्ड-बेज्ड पद्धति

अल्पवर्षा के कारण किसानों को खेती करने की नई पद्धतियों के साथ खेती करने का मन बनाना होगा। समय रहते किसान भू-जल स्तर, बारिश के पानी प्रदाय की स्थित को ध्यान में रखते हुए रबी की फसल के लिए अहम निर्णय लेना होगा। अल्पवर्षा और सूखे जैसी स्थिति से निपटने किसानों को चने की खेती के लिए रेज्ड-बेज्ड पद्धति से खेती करना होगा। गेहूं की फसल के लिए कम पानी वाली किस्म का चयन करना होगा। 

कम रकबे से मवेशियों के चारे का संकट 

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