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किसान

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से सम्बंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है जो लोग कृषि के कार्य को करके अपनी जीविका उपार्जन करते है उन्हें किसान कहते है 
किसानो को निम्न बिन्दुओ से भी जाना जा सकता है 

1. जो फसलें उगाते हैं।

2. कृषक (farmer)

3. खेतिहर – खेती करने वाला।

4. जो खेत और फसल में अपना योगदान देते हैं।

5. जिनके पास स्वयं के खेत है और दूसरे कामगारों से काम करवाते हैं, किसान हैं।

6. किसान खेतों में पसीना बहाकर अन्न उपजाते हैं

पट्टा खत्म होने पर भी भूमि से बेदखल नहीं होंगे किसान - सुप्रीम कोर्ट

पट्टा खत्म होने पर भी भूमि से बेदखल नहीं होंगे किसान - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि अवधि बीत जाने पर भी किसान को पट्टे की भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जमीन के मालिक को पट्टे की अवधि बीत जाने की जानकारी हो या वह जमीन के एवज में किराया ले रहा हो तो किसान का कब्जा बरकरार रहेगा।

संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम के एक प्रावधान का उल्लेख करते हुए जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस अरुण मिश्र और जस्टिस पीसी पंत की तीन सदस्यीय पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने जमीन के पट्टे की अवधि बीत जाने के बाद किसान को जमीन खाली करने का आदेश दिया था।

खेती में कोताही बर्दाश्त नहीं

खेती में कोताही बर्दाश्त नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ सहयोगियों को कड़ा संदेश भी दिया है। खास संदेश है कि सरकार की प्राथमिकता वाले कृषि क्षेत्र में कोताही बर्दाश्त नहीं है। तभी को कृषि मंत्रालय से जुड़े दोनों राज्य मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। समूची सरकार में एक मात्र कृषि मंत्रालय है, जहां तीन-तीन राज्य मंत्रियों का सबसे बड़ा अमला है।

कश्मीर की वादियों के किसानो की समस्यायें होगी दूर केन्द्र करेगा आँकलन

कश्मीर की वादियों के किसानो की समस्यायें होगी दूर केन्द्र  करेगा आँकलन

रियासत में अब कृषि गणना की की जाएगी। यह अभियान पूरे राज्य में जुलाई के पहले सप्ताह से चलेगा। दसवीं कृषि गणना में कृषि संबंधी आंकड़े जुटाए जाएंगे। इसमें प्रत्येक गांव, ब्लाक, तहसील और राज्य स्तर पर कृषि योग्य भूमि, संसाधनों तथा अन्य का ब्योरा इकट्ठा होगा। कृषि गणना के तहत पूरी रियासत में सर्वे होगा। इसमें विभिन्न कैटेगरी के आधार पर भूमि का आंकड़ा लिया जाएगा। मसलन मामूली भूमि, छोटे, मध्यम तथा बड़े खेत। यह जानकारी सामाजिक आधार पर भी ली जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के पास विभिन्न कैटेगरी में कितनी भूमि है। साथ ही महिला और पुरुष के आधार पर भी डाटा एकत्रित होगा।

मौसम विभाग ने कहा, इस साल सामान्य या अत्यधिक बारिश होगी

मौसम विभाग ने कहा, इस साल सामान्य या अत्यधिक बारिश होगी

कम मॉनसून की संभावना से इनकार करते हुए भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि इस बात की 96 फीसदी संभावना है कि इस साल सामान्य या अत्यधिक बारिश होगी।

दूसरा दीर्घावधि का अनुमान जारी करते हुए मौसम विभाग के महानिदेशक लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा कि पश्चिमोत्तर भारत में दीर्घकालिक औसत की 108 फीसदी बारिश होगी, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में एलपीए की 113 फीसदी वर्षा होगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र में 94 फीसदी वर्षा होगी, जो सामान्य से कम है।

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