जहरीली खेती का जवाब जैविक खेती खेती

जो जमीन हमारा भरण-पोषण करती है उसमें अच्छी पैदावार के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों के रूप में जहर डाल दिया गया है। इसलिए जो फसल हो रही है उसके दानों में जीवन कम जहर अधिक समा गया है। जो अन्न हम ग्रहण कर रहे हैं वह पोषण न देकर स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है। इसलिए जैविक या प्राकृतिक खेती पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा है। 

रसायन से खत्म होता जमीन का पोषण

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 फसल से जुड़े तीन चौंकाने वाले परिणाम। रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल किस कदर हमारी जमीन और सेहत पर असर डाल रहे हैं, ये तो महज उदाहरण भर हैं। उर्वरकों के हानिकारक तत्व फसलों के जरिए हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं। नतीजा-जमीन और हमारी सेहत बिगड़ रही है। जमीन की उत्पादन क्षमता घट रही है। रसायन आहिस्ता हमारे शरीर में जहर घोल रहे हैं।

गन्ने में सफेद सुंडी का रोग अब लाइलाज नहीं

गन्ना, मूंगफली और आलू आदि फसलों पर कहर बनकर टूटने वाली सफेद सुंडी (ह्वाइट ग्रब) जिसे सफेद लट और सफेद गिलार के नाम भी जाना जाता है, अब लाइलाज नहीं रह गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के राष्ट्रीय कृषि उपयोगी कीट ब्यूरो के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए इस रोग का सौ फीसदी इलाज संभव हो सका है। इसके तहत मित्र कीटों के जरिए सफेद कीटों का खात्मा किया जाता है। वैज्ञानिकों ने किसानों की सुविधा के लिए इस तकनीक को पाउडर के रूप में भी विकसित किया है। जिसे पौधारोपण के समय ही मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके बाद पाउडर से पैदा होने वाले मित्र कीट स्वयं ही सफेद सुंडी का काम

उन्नतिशील प्रजातियां ही उत्कृष्ट खेती का आधार

गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने मध्य प्रदेश से आई टीम को ‘मुख्यमंत्री खेत दर्शन’ योजना के तहत तमाम जानकारियां दीं। बताया कि उन्नतशील प्रजातियां ही उत्कृष्ट खेती का आधार होती हैं। इसलिए स्वीकृत प्रजातियाें की बुवाई करना चाहिए। साथ ही प्रमाणिक पौधशालाओं से बीज लेना चाहिए। इसके लिए उन्होंने मृदा का हेल्थ कार्ड बनवाने के बारे में भी बताया। कहा कि इससे मृदा प्रदूषण कम होने के साथ ही उत्पादन लागत में भी कमी आएगी। बताया कि किसान खेत की मिट्टी संस्थान लेकर आएं। इससे उनके खेत का हेल्थ कार्ड बन जाएगा। 

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