भूजल संकट : कृषि के लिए घातक

water problem

वर्तमान में कृषि, पशु-पालन, उद्योग-धंधों तथा पेयजल हेतु नदी जल व भूजल का ही सर्वाधिक उपयोग हो रहा है। उक्त उपयोगार्थ नदी जल से पर्याप्त पूर्ति न होने के फलस्वरूप भूजल का पर्याप्त दोहन किया जाता है। फलतः भूजल स्तर 1 से 1.5 मीटर प्रतिवर्ष के हिसाब से नीचे गिरता जा रहा है। परिणामस्वरूप भूजल के ऊपरी जल स्रोत सूख रहे हैं। अतः जल जल की आवश्यकता की पूर्ति हेतु भूजल के निचले एवं गहरे जल स्रोतों का दोहन किया जा रहा है, इनमें अधिकांश जल लवणीय गुणवत्ता का मिल रहा है। इसके कारण मृदा स्वास्थ्य खराब होने के कारण फसलोत्पादन व मानव स्वास्थ्य पर इसके अवांछित परिणाम स्पष्ट अनुभव किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प

जल प्रदूषण/जल संकट

“जल (H2O) में सामान्यतः कुछ लाभाकरी खनिज लवण संतुलित आहार के कुछ अंश के रूप में विद्यमान रहते हैं, परंतु इसमें जहरीले रसायनों, कीटाणुओं, अस्वच्छता आदि की उपस्थिति ही जल प्रदूषण है।”

पृथ्वी पर लगभग 70 प्रतिशत पानी है जिसका 3 प्रतिशत ही पेय रूप में है, बाकी अपेय/अशुद्ध है। इस 3 प्रतिशत पेयजल का लगभग 90 प्रतिशत से भी अधिक भाग भूगर्भ जल के रूप में है, जिसका जल-स्तर अधिकाधिक और अविवेकपूर्ण दोहन, अपव्यय और संरक्षणहीनता और अपुन्रभरण के कारण खतरनाक रूप से घट रहा है और मोटरपंपों, ट्यूबवेलों से निकाला गया भूगर्भ जल तेजी से प्रदूषित हो रहा है।

उत्तरी जोन क्षेत्रीय कृषि मेला I.V.R.I. में आज से प्रारम्भ

अपने बागीचे के लिए बनाएं खुद खाद

अपने बागीचे में खुद से बनाई गई खाद न केवल पैसे बचाती है बल्कि पर्यावरण के हिसाब से भी काफी बेहतरीन होती है। अगर आप सोंच रहें हैं कि इसको बनाने के लिए आपको बाजार से कुछ सामान खरीदने की आवश्‍यक्‍ता पड़ेगी तो ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं होगा। बस आपको करना केवल यह होगा कि आपके घर का जितना भी कूडां-कबाड़ा हो उसे सम्‍भाल कर फेंके जिससे वह आपके बागीचे में काम आ सके। खाद बनाने की विधी- 1.अब सबसे पहले यह सवाल उठता है कि इस खाद को आप अपने घर में रखेगीं कहां?

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