अमरूद की नई किस्‍में, एक बार लगाए 28 साल तक कमाए मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों ने अमरूद की कुछ नई किस्म तैयार की है, जो एक बार लगाने के बाद 28 साल तक फलते रहेंगे। इस खेती से किसानों के जीवन में भी आमूल-चूल परिवर्तन हो सकता है।

अमरूद की खेती के तरीके भी आसान हैं, जिसे किसानों के अलावा आम आदमी भी शुरू कर सकता है और हर साल प्रति एकड़ दो से ढाई लाख रुपए का मुनाफा लिया जा सकता है। अहम बात यह है कि इसमें मजदूरों की जरूरत कम पड़ेगी।

फसलों के बीज नहीं अब गोली बोएंगे किसान खेती की नई तकनीक

 आमतौर पर घाटे का सौदा मानी जाने वाली खेती अब किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी। खाद-बीज की बढ़ती महंगाई की वजह से खेती से विमुख हो रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है कि वे फसल के बीज गोली के रूप में बोएंगे और अच्छा उत्पादन लेंगे।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिक ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिसमें धान, दलहन, तिलहन के बीजों पर कीटनाशक, उर्वरक का आवरण चढ़ाकर न सिर्फ उसकी उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी की जा रही है, बल्कि इससे श्रम व लागत में भी कमी आई है।

फसलों के उत्‍पादन में होगी बढ़ोतरी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को 05 अपैल, 2015 तक निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1. 3 तथा 4 अपैल को दिल्ली राष्टीय राजधानी के अधिकतर क्षेत्रों में वर्षा होने की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए पूर्ण रूप से पके तोरिया या सरसों फसल की अतिशीघ्र कटाई करें। तथा कटी हुए फसल को ढक कर रखें । 75-80 प्रतिशत फली का रंग भूरा होना ही फसल पकने के लक्षण हैं। फलियों के अधिक पकने की स्थिति में दाने झड़ने की संभावना होती है। गहाई के बाद फसल अवशेषों को नष्ट कर दें, इससे कीट की संख्या को कम करने में मदद मिलती है।

बंजर हुई जमीन और घटी पैदावार बेबस किसान

सरकारी नीति में हरित खाद सब्सिडी सिस्टम को बढ़ावा देने की जरूरत है जो खेती को पारंपरिक प्राकृतिक पद्धति पर ले जाते हुए क्षरित, खस्ताहाल और बंजर हो चुकी जमीन की दशा सुधारे। केवल इतना ही नहीं बल्कि रासायनिक उर्वरकों के उत्पादन व प्रयोग का सीधा प्रभाव जलवायु परिवर्तन पर पड़ता है। इनके कारण ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। किसान नाइट्रोजन उर्वरक धड़ल्ले से इसलिए इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि उस पर सरकारी छूट है और वह सस्ते दामों में उपलब्ध है। अगर सरकार हरित खाद पर यह छूट दे तो वे उसे इस्तेमाल करेंगे। 

Pages