घर पर बनाएं जैविक खाद

खेत की उर्वरकता बढ़ाएं आसानी से बनाएं जैविक खाद

किसान अपनी फसल की अच्छी पैदावार के लिये विभिन्न तरह की रसायनिक खादों का इस्तेमाल करते हैं। खेती में रसायनिक खादों के इस्तेमाल से फसल के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता पर भी असर पड़ता है। ऐसे में किसान जैविक खाद अपना कर अपनी फसल की पैदावार के साथ-साथ जमीन की उर्वरता भी बढ़ा सकते हैं।

जैविक खाद बनाने का आसान तरीका

रासायनिक खाद का बेतहाशा उपयोग, उर्वरता बढ़ाने में जमीन हो रही बर्बाद

इन दिनों उत्पादन बढ़ाने के नाम पर किसानों द्वारा रासायनिक खादों का बेतहाशा उपयोग कर रहे हैं। इसके चलते जमीन में अम्लीयता की मात्रा बढ़ती जा रही है, जिसकी वजह धीरे-धीरे जमीन कठोर होती जा रही है। कठोर होने की वजह से जमीन की घुलनशीलता में कमी आ गई है। ऐसे में पौधे पोषक तत्वों का शोषण नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।

फव्वारा सिंचाई से पानी की बर्बादी कम

देश भर पारंपरिक तौर पर होने वाले कृषि कार्यों में बहुत अधिक जल बर्बात होता है जिसे उन्नत सिंचाई प्रणालियों के प्रयोग से कम किया जा सकता है। ऐसी ही एक प्रणाली है फव्वारा सिंचाई या बौछारी सिंचाई प्रणाली इसके प्रयोग से किसान 30 से 50 प्रतिशत तक पानी का अपव्यय बचाया जा सकता है।
बौछारी सिंचाई का तरीका

धान की फसल को बरबाद कर सकता है खैरा

खरीफ फसलों में धान की फसल मुख्य है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान की खेती सबसे ज्यादा होती है। इस फसल में खैरा रोग की संभावना ज्यादा होती और अगर समय से उपचार नहीं हुआ तो फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। समय रहते इसकी पहचान और रोग से बचाव का उपाय कर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस रोग का प्रमुख कारण मिट्टी में जिंक की कमी होती है, जिसके बारे में मृदा परीक्षण कर जाना जा सकता है।

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