पीलीभीत

पीलीभीत भारतीय के उत्तर प्रदेश प्रांत का एक जिला है, जिसका मुख्यालय पीलीभीत है। इस जिले की साक्षरता - ६१% है, समुद्र तल से ऊँचाई -१७१ मीटर और औसत वर्षा - १४०० मि.मी. है। इसका क्षेत्रफल ३,५०४ वर्ग किलोमीटर है जिसमें से ७८४७८ हेक्टेयर भूमि पर सघन वन हैं। हिमालय के बिलकुल समीप स्थित होने के बावजूद इसकी भूमि समतल है। पीलीभीत की अर्थ व्यवस्था कृषि पर आधारित है। यहां के उद्योगों में चीनी, काग़ज़, चावल और आटा मिलों की प्रमुखता है। कुटीर उद्योग में बांस और ज़रदोज़ी का काम प्रसिद्ध है। पीलीभीत मेनका गांधी का चुनाव क्षेत्र भी है।

यह नगर ज्ञान एवं साहित्य की अनेक विभूतियों का कर्मस्थल रहा है। नारायणानंद स्वामी 'अख्तर' संगीतज्ञ, कवि, साहित्यकार तथा इतिहासकार के रुप में प्रसिद्ध रहे हैं। चंडी प्रसाद 'हृदयेश' कहानीकार, एकांकीकार, उपन्यासकार, गीतकार एवं कवि थे। कविवर राधेश्याम पाठक 'श्याम' ने गद्य एवं पद्य दोनों साहित्य का सृजन किया और प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार अंजुम पीलीभीती ने 'रतन', 'अनमोल घड़ी', 'ज़ीनत', 'छोटी बहन' एवं 'अनोखी अदा' आदि फिल्मों के प्रसिद्ध गीत लिखकर पीलीभीत नगर का नाम रोशन किया।

"धार्मिक इतिहास में " राजा मोरोध्‍वज की कहानी सवने सुनी होगी जिन्‍होने अपने वेटे को आरे से काट कर कृष्ण भगवान को आधा तथा आधा उनके साथ आये सिंह के रूप में अर्जुन को खिलाने के लिये दे दिया था। उस राजा का किला दियूरिया के जंगल में आज भी है।

चूका बीच- पीलीभीत वन प्रभाग द्वारा ७४ वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में शारदा नदी एवं मुख्य शारदा कैनाल के बीच, शारदा सागर के किनारे, एक पर्यटन केंद्र का विकास किया गया है। शारदा सागर जलाशय की लंबाई २२ किलो मीटर और चौड़ाई ३ से ५ किलो मीटर है। इतने बड़े जलक्षेत्र के किनारे स्थित होने के कारण यह 'बीच' जैसा दिखाई पड़ता है अतः इसे 'चूका बीच' कहते है।

जलाशय में अनेक प्रकार की मछलियां पाई जाती हैं। वन क्षेत्र में साल वृक्ष तो हैं ही, अर्जुन, कचनार, कदंब, हर्र, बहेड़ा, कुसुम, जामुन, बरगद, बेल, सेमल आदि अनेक प्रकार के बड़े वृक्ष पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक प्रकार की जड़ी बूटियां और घासें भी यहां देखी जा सकती हैं। प्राकृतिक संपदा भरपूर होने के कारण यहां वन्यपशुओं, पक्षियों और सरीसृप जाति के प्राणियों की भी बहुतायत है। प्राकृतिक संपदा भरपूर होने के कारण यहां वन्यपशुओं, पक्षियों और सरीसृप जाति के प्राणियों की भी बहुतायत है। यह स्थान पीलीभीत से लगभग ५० किलो मीटर की दूरी पर स्थित है।

लग्गा भग्गा वन क्षेत्र -

कृषि वानिकी विज्ञान केन्द्र, पीलीभीत
बराही क्षेत्र के अंतरगत इस वन प्रभाग की सीमा नेपाल से मिलती है। इसके एक ओर शारदा नदी है, दूसरी ओर नेपाल की 'शुक्ला फाटा सेंचुरी' तीसरी ओर किशनपुर का वन्य जीव विहार। यहां पर एक ओर बड़े-बड़े पेड़ हैं तो दूसरी ओर ऊंची घास और दलदल। यह अनेक प्रकार के पशुओं के निवास की आदर्श परिस्थतियां पैदा करता है। यहां सियार, हिरन और लोमड़ी जैसे मध्य आकार के पशु तो है ही शेर, हाथी और गैंडे भी आराम से विहार करते हुए देखे जा सकते हैं। यह वन क्षेत्र पीलीभीत से ७० किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। विविध प्रकार के रंग बिरंगे पक्षी जैसे धनेश, कठफोड़ा, नीलकंठ, जंगली मुर्गा, मोर, सारस भी यहां देखे जा सकते हैं। यहाँ दुर्लभ प्रजाति का एक खरगोश भी पाया जाता है जिसे 'स्पिड हेअर' कहते हैं।

"गोमती उदगम स्‍थल " उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की शान गोमती नदी का उदगम पीलीभीत से हुआ है यहां एक सरोवर है जिस्‍से गोमती नदी निकलती हैा

"चक्रतीरर्थ" पीलीभीत शहर से १० कि॰मी॰ की दूरी पर जहानावाद के निकट यह स्‍थान है यहां का सरोवर चक्र की तरह गोल है

"एकोत्‍तर नाथ"

दोनों वन प्रदेशों में जाने व ठहरने की समुचित व्यवस्था है।

किसान हेल्प का प्रमुख कार्य क्षेत्रों में से एक है 

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए लता वर्गीय सब्जियों के बीज पर 100% अनुदान

लता वर्गीय सब्जियों के बीज पर 100% अनुदान

उपनिदेशक उधान बरेली मण्डल द्वारा बरेली मण्डल के जनपद बरेली , पीलीभीत ,बदायुं एवं शाहाजहाँपुर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंर्तगत वर्ष 2015 -16 में किर्यन्वन हेतु नर्सरी सीडिंग इनलो टनल पौली नेट एंड प्रोडक्शन आफ हाई वैल्यू वैजीटेबलस परियोजना संचालित हो रही है यह योजना पूरे प्रदेश के किसानों के लिए उपलब्ध है उपनिदेशक उधान बरेली मण्डल ने योजना की जानकारी देते हुए बताया की इस योजना के अंतर्गत जायद मौसम में लता वर्गीय लौकी , तोरई ,करेला ,खीरा आदि का वितरण  किया जायेगा इस योजना के अंर्तगत किसान भाइयों द्वारा मन पसंद बीज खरीदने की आजादी होगी तथा उसकी रसीद उद्यान विभाग कार्यालयों पर जमा कर दे