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जल्द बराबर हो जायेगी केसर व सोने की कीमत

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धातुओं में जो हैसियत सोने को हासिल है, वही हैसियत खाद्य पदार्थो में केसर को हासिल है. दोनों की कीमतों को लेकर भी हम-आप बचपन से तरह-तरह की कहानियां सुनते रहे हैं कि सोना महंगा है या केसर? लेकिन अब सोना और केसर की कीमत को लेकर अधिक तुलनात्मक आंकड़ा आ रहा है. केसर की कीमतें जहां तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं सोने की कीमत में कमी आ रही है. ऐसे में जल्द ही दोनों की कीमतें बराबर होने का अनुमान है. दो लाख रुपये किलो यानी 20 हजार रुपये में वर्तमान में बाजार में केसर मिल रहा है, वहीं सोने की कीमतें अभी 26 से 27 हजार के बीच है, लेकिन अगले कुछ महीनों में इसके 20 से 25 हजार के बीच होने का अनुमान है, जबकि केसर की कीमतें आने वाले दिनों में बढ़ेगी. ऐसे में अगले कुछ महीनों में एक ऐसा समय आयेगा जब इन दोनों की कीमतें लगभग बराबर हो सकती हैं.

अनुमान तो यह भी है कि आने वाले दिनों में केसर की कीमत सोने की कीमत को भी पीछे छोड़ देगी. लगातार केसर की बढती कीमत सभी मसालों में इसे बेश्‍किमती बना चुकी है. शायद यहीं कारण है कि  अन्‍य बहुमूल्‍य धातुओं के साथ स्‍मगलरों की नजर अब इस सुनहरे लाल रंग के मसाले पर भी पड गई है. 

खाने का जायका बढाने के साथ केसर का उपयोग कई तरह के आयुर्वेदिक उपचार में भी किया जाता है. हल्‍के और अपने सुनहरे लाल रंगों के साथ यह पदार्थ कमल की भीनी खुशबू लिए होता है. बताया जाता है कि केसर की कीमत अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में 2लाख प्रति किलो तक पहुंच चुकी है. महंगे धातुओं में गिने जाने वाले सोने की ही तरह आज केसर भी उसी गिनती में आ चुका है. जहां पिछले एक महीने में अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में सोने के दामों में गिरावट आयी है, वहीं केसर के दामों में पिछले 2 सालों में करीब 10 हजार रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है. जानकारों की मानें तो अगर इसी तरह केसर के दामों में लगातर बढोतरी हुई तो जल्‍द ही केसर सोने के दाम को छू लेगा.  

 

केसर के हैं कई लाभ

   

केसर के गुण भी इसकी कीमत की ही तरह कई हैं. पुराने जमाने में एलेक्‍जेंडर द ग्रेट सिकंदर इसका उपयोग युद्ध क्षेत्र में घायल हुए सैनिकों के घावों को भरने के लिए करते थे. तो वहीं रानियां अपनी खूबसूरती बढाने के लिए केसर का उपयोग किया करती थीं. शाही बिरयानी और खीर में इसका उपयोग व्‍यंजनों को खूबसूरत रंग और बेहतरीन  खुशबू प्रदान करता है. ऋषि मुनियों का मानना है इसका उपयोग सर्दी-खांसी और सेक्‍स-लाइफ को बढाने भी किया जाता है.

 

अकेले ईरान करता है 95 प्रतिशत उत्पादन 

 

पूरे  विश्‍व में  केसर के उत्‍पादक देशों में ईरान, स्‍पेन,भारत , फ्रांस, ईटली, ग्रीस और मोरक्‍को हैं. जहां अकेला ईरान ही पूरे विश्‍व में 95 फीसदी केसर का उत्‍पादन करता है. वहीं दूसरे स्‍थान पर स्‍पेन भी केसर के उत्‍पादन का अहम स्रोत है. ऐसा अनुमान है कि  पूरे विश्‍व में ईरान और स्‍पेन मिलकर  हर वर्ष 300टन केसर का उत्‍पादन करते हैं. भारत में केसर उत्‍पादक राज्‍य जम्मू-कश्‍मीर है, यहां किस्तवाड़  इलाके में केसर की खेती की जाती है. लेकिन इस साल राज्‍य में आए बाढ के कारण केसर के उत्‍पादन में 75 फीसदी तक की कमी आयी है.

 

खेती में अधिक मेहनत के कारण बढ़ी कीमत

केसर के उत्‍पादन में होने वाली मश्‍क्‍कत इसके बढते कीमत का कारण है. कहा जाता है कि 1किलो केसर के उत्‍पादन में 1 लाख केसर के फूलों (क्रोकस सेटाइवस)का प्रयोग किया जाता है. यह बात और भी हैरान करने वाली है  कि करीब 1 हेक्‍टेयर की भूमि में सिर्फ आधे किलो केसर का ही उत्‍पादन किया जा सकता है. केसर का इतना महंगा उत्‍पादन के बढते भाव का कारण है. केसर की बढती कीमत का असर कई स्‍न्‍ौक्‍स और आइसक्रीम निमार्ता कंपनियों पर भी पड रहा है. हल्‍दीराम, वादीलाल और बीकाजी जैसी कंपनियां भारी मात्रा में केसर का उपयोग अपने उत्‍पादों में करती हैं.     

 

साभार प्रभात खबर