विभिन्न महीनों में पशुपालन से सम्बन्धित कार्य

image vatanary: 
विभिन्न महीनों में पशुपालन से सम्बन्धित कार्य

 पशुपालन कार्य
वर्ष के विभिन्न महीनों में पशुपालन से सम्बन्धित कार्य (पशुपालन कलेण्डर) इस प्रकार हैं-

अप्रैल (चैत्र)
*1. खुरपका-मुँहपका रोग से बचाव का टीका लगवायें। 
*2. जायद के हरे चारे की बुआई करें, बरसीम चारा बीज उत्पादन हेतु कटाई कार्य करें। 
*3. अधिक आय के लिए स्वच्छ दुग्ध उत्पादन करें। 
*4. अन्तः एवं बाह्य परजीवी का बचाव दवा स्नान/दवा पान से करें।

रोजगार और समृद्धि के लिए कारगर है रामबांस की खेती

अमेरिकन मूल का पौधा सिसल (अगेव) जिसे भारत में खेतकी तथा रामबांस कहते है। आमतौर पर सिसल को शुष्क क्षेत्रों में पशुओं और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु खेत की मेड़ों पर लगाया जाता रहा है। अनेक स्थानों पर इसे शोभाकारी पौधे के रूप में भी लगाया जाता है। परन्तु अब यह एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक रेशा प्रदान करने वाली फसल के रूप में उभर रही है। इसकी पत्तियों से उच्च गुणवत्ता युक्त मजबूत और चमकीला प्राकृतिक रेशा प्राप्त होता है।  विश्व में रेशा प्रदान करने वाली प्रमुख फसलों में सिसल का छटवाँ स्थान है और पौध रेशा उत्पादन में दो प्रतिशत की हिस्सेदारी है। वर्त्तमान में हमारे देश में लगभग 12000 टन सिसल रेशे क

राजस्थान के किसानों का होगा लोन का आधा ब्याज माफ

राजस्थान के किसानों का होगा लोन का आधा ब्याज माफ

राजस्थान में किसानों को कर्ज चुकाने पर ब्याज में 50 फीसदी तक की छूट दी है. सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने बताया कि यह योजना 30 अप्रैल तक लागू रहेगी. एक जुलाई, 2016 को 10 वर्ष से अधिक के अवधि पार कर्ज लिए हुए किसानों को बकाया अवधि पार पैसा जमा कराने पर ब्याज में 50 फीसदी छूट मिलेगी.

किलक के अनुसार 6 वर्ष से अधिक लेकिन 10 वर्ष तक के अवधि पार लेनदार किसानों को 40 फीसदी और एक साल से ज्यादा लेकिन 6 साल तक के अवधि पार किसानों को 30 फीसदी छूट मिलेगी. सहकारिता मंत्री ने बताया कि इस योजना में किसानों के दण्डनीय ब्याज और वसूली खर्च की राशि को माफ किया गया है.

गन्ना उत्पादन की एस.एस.आई. तकनीक

गन्ना फसल की भारी जल मांग, गिरते भूजल स्तर तथा रासायनिको के  बढ़ते उपयोग को  देखते हुए पारस्थितिक समस्यायें भी बढ़ रही है । अब समय आ गया है कि हमें प्रकृति मित्रवत खेती में कम लागत के  उन्नत तौर तरीके  अपनाने की आवश्यकता है जिससे प्राकृतिक संसाधनो का कुशल प्रबन्धन करते हुए गन्ना फसल से अधिकतम लाभ अर्जित किया जा सके । इस परिपेक्ष्य में धान का उत्पादन बढाने में हाल ही में अपनाई गई "श्री विधि" कारगर साबित हो  रही है। इसी तारतम्य में हैदराबाद स्थित इक्रीसेट व डब्लू.डब्लू.एफ. प्रोजेक्ट ने गन्ना उत्पादन की एस.एस.आई.

Pages