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Organic Farming

गेंहू की उन्नत खेती

 

  गेहूँ की खेती विश्व के प्रायः हर भाग में होती है । संसार की कुल 23 प्रतिशत भूमि पर गेहूँ की ख्¨ती की जाती है ।  गेहूँ विश्वव्यापी महत्त्व की फसल है। मुख्य रूप से एशिया में धान की खेती की जाती है, तो भी विश्व के सभी प्रायद्वीपों में गेहूँ उगाया जाता है।  विश्व में सबसे अधिक क्षेत्र फल में गेहूँ उगाने वाले प्रमुख तीन  राष्ट्र भारत, रशियन फैडरेशन और  संयुक्त राज्य अमेरिका है । गेहूँ उत्पादन में चीन के बाद भारत तथा अमेरिका का क्रम आता है ।

  

उपयुक्त जलवायु क्षेत्र

पेठे की खेती से कम समय में पाएं ज्यादा मुनाफा

पेठा कद्दू सब्जी के रूप बहुत कम प्रयोग किया जाता है. लेकिन इसके उलट मिठाई के रूप में बहुत अधिक मांग है. किसानों के जागरूक न होने के कारण मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पाता है. क्योंकि इसका अंतिम उत्पाद सुखे मिठाई के रूप में होता है, अतः यह लंबे समय तक संग्रहित किया जा सकता है.

उन्नत प्रजाति :- पूसा हाइब्रिड 1, हरका चंदन, नरेंद्र अमृत, सीएस- 19, सी ओ 1, कल्याणपुर पंपकिंग 1 आदि प्रमुख प्रजातियाँ हैं.

बुवाई का समय- जुन-जुलाई व नदियों के किनारे नवंबर-दिसबंर माह में बोया जाता है.

औषधीय फसल अफीम की खेती

पोस्त फूल देने वाला एक पौधा है जो पॉपी कुल का है। पोस्त भूमध्यसागर प्रदेश का देशज माना जाता है। यहाँ से इसका प्रचार सब ओर हुआ। इसकी खेती भारत, चीन, एशिया माइनर, तुर्की आदि देशों में मुख्यत: होती है। भारत में पोस्ते की फसल उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में बोई जाती है। पोस्त की खेती एवं व्यापार करने के लिये सरकार के आबकारी विभाग से अनुमति लेना आवश्यक है। पोस्ते के पौधे से अहिफेन यानि अफीम निकलती है, जो नशीली होती है।

गेहूँ में पीलापन कारण व निराकरण

 पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण पत्तियों पर दिखाई देते हैं. हर एक तत्व की कमी के लक्षण अलग-अलग होते हैं. अधिकतर अवस्थाओं में पत्तियां पीली हो जाती हैं. अगर इस पीलेपन की समय पर पहचान हो जाए तो उपयुक्त खाद या पर्णीय स्प्रे के द्वारा इसको दूर किया जा सकता है.

क्यों होता है पीलापन

गेहूं की खड़ी फसल में पीलेपन के कई कारण हो सकते हैं. इस पीलेपन की समस्या का समाधान पीलेपन के कारण में ही निहित है इसलिए पहले पीलेपन के कारण को जानना अति आवश्यक है.

कार्बन नत्रजन अनुपात का महत्व

रागी (मडुआ) की खेती

रागी शुष्क मौसम में उगाया जा सकता है, गंभीर सूखे को सहन कर सकती है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है. कम समय वाली फसल है, 65 दिनों में कटाई कर सकते हैं. सभी बाजरा में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है. प्रोटीन और खनिजों की मात्रा ज्यादा है. महत्वपूर्ण अमीनो एसिड भी है. कैल्शियम (344 मि.ग्रा.) और पोटाशियम (408 मि.ग्रा.) की भरपूर मात्रा है. कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्ति के लिए बहुत लाभदायक है, क्योंकि लोह तत्वों की मात्रा ज्यादा है.

ब्रोकोली की खेती आर्थिक एवं स्वास्थ्य दोनों को लाभकारी

ब्रोकोली की खेती ठीक फूलगोभी की तरह की जाती है. इसके बीज व पौधे देखने में लगभग फूल गोभी की तरह ही होते हैं| ब्रोकोली का खाने वाला भाग छोटी छोटी बहुत सारी हरे फूल कलिकाओं का गुच्छा होता है जो फूल खिलने से पहले पौधों से काट लिया जाता है और यह खाने के काम आता है.

देश की मिट्टी में कम हुए पोषक तत्व:बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी

पूरे देश भर की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी आ रही है। इससे खेतीबाड़ी में करीब 20 फीसदी तक उत्पादन घट गया है। सोलन के बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के विशेषज्ञों की मिट्टी की जांच में यह खुलासा हुआ है। कृषि के लिए मिट्टी में पाए जाने नाइट्रोजन, पोटाश, सल्फर, जिंक और बोरान में कमी आ गई है। माना जा रहा है कि इससे धरती की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित हो ही रही है, फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो मिट्टी की अच्छी सेहत के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन वातावरण और पानी से मिलते हैं।

परवल (सब्जी) की उन्नत फसल

परवल सब्जी की फसलो में आता है, इसकी खेती बहुवर्षीय की जाती हैI इसे ज्यादातर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल में उगाया जाता हैI लेकिन असम, ओडिसा, मध्य प्रदेश , महाराष्ट्रा एवं गुजरात के कुछ भागो में इसकी खेती की जाती हैI इसके साथ ही बिहार की दियार भूमि तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के रैनफेड क्षेत्र में अत्याधिक खेती की जाती हैI इसमे विटामिन ए एवं सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैI
जलवायु 
परवल को गर्म और आर्द्र जल वायु कि आवश्यकता होती है औसत वार्षिक वर्षा 100-150 से.मी,तक होती है ।

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