Organic Farming

गेंहू की उन्नत खेती

 

  गेहूँ की खेती विश्व के प्रायः हर भाग में होती है । संसार की कुल 23 प्रतिशत भूमि पर गेहूँ की ख्¨ती की जाती है ।  गेहूँ विश्वव्यापी महत्त्व की फसल है। मुख्य रूप से एशिया में धान की खेती की जाती है, तो भी विश्व के सभी प्रायद्वीपों में गेहूँ उगाया जाता है।  विश्व में सबसे अधिक क्षेत्र फल में गेहूँ उगाने वाले प्रमुख तीन  राष्ट्र भारत, रशियन फैडरेशन और  संयुक्त राज्य अमेरिका है । गेहूँ उत्पादन में चीन के बाद भारत तथा अमेरिका का क्रम आता है ।

  

उपयुक्त जलवायु क्षेत्र

नवम्बर माह में गन्ने की खेती में क्या करें

तापक्रम कम होने के कारण गन्ने के जमाव पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अत:: तापक्रम उचित (16-30 डिग्री से0 होने की दशा में शरदकालीन गन्ने की बुवाई करें।
नवम्बर के अन्त में गन्ना बुवाई करने हेतु पाली बैग/डीकम्पोजेबुल बैग में एक-एक ऑंख के टुकड़े की नर्सरी डालें। देर से काटे गये धान की फसल के उपरान्त खाली खेत में भी पाली बैग/डीकम्पोजेबुल बैग में तैयार किये गये पौधे की रोपाई करके अच्छी उपज की जा सकती है।

ऊसर भूमि को सुधार कैसे करें

ऊसर सुधार का कार्य मई के अंतिम अथवा जून के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ करना चाहिए। सर्वप्रथम खेत की जुताई करके उसकी मेड़बन्दी कर लें। इसके उपरान्त जिप्सम की आवश्यक मात्रा को खेत में समान रूप से बिखेर कर लगभग 10 सेमी० गहराई तक मिट्टी में मिला दें। जिप्सम मिलाने के तुरन्त बाद खेत में पानी भर दें जो लगभग दो सप्ताह तक भरा रहना चाहिए। ध्यान रहे कि खेत में लगभग 10-15 सेमी० ऊंचाई में पानी अवश्य भरा रहे। ऐसा करने से यह ऊसर भूमि को घुलनशील लवण तथा सोडियम निचली सतहों में निक्षालित हो जाते हैं। जिसे मृदा अम्ल अनुपात एवं पी०एच० कम हो जाता है।

किसान जिप्सम का उपयोग क्यों, कब और कैसे करें ?

किसान फसल उगाने के लिए सामान्यत: नत्रजन, फॉस्फोरस तथा पोटैशियम का उपयोग करते है, कैल्शियम एवं सल्फर का उपयोग नहीं करते है। जिससे कैल्शियम एवं सल्फर की कमी की समस्या धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर रही है, इनकी कमी सघन खेती वाली भूमि, हल्की भूमि तथा अपक्षरणीय भूमि में अधिक होती है। कैल्शियम एवं सल्फर संतुलित पोषक तत्व प्रबन्धन के मुख्य अवयवको में से है जिनकी पूर्ति के अनेक स्त्रोत है इनमें से जिप्सम एक महत्वपूर्ण उर्वरक है।

धान की जैविक खेती

भूमि का चुनाव

धान कि खेती के लिए अच्छी उर्वरता वाली समतल व अच्छे जलधारण क्षमता वाली मटियार या चिकनी मिटटी सर्वोत्तम होती है सिचाई कि पर्याप्त सुबिधा होने पर हलकी भूमियों में भी धान कि खेती सफलता पूर्वक कि जा सकती है .

खेत की तैयारी

हींग की खेती

हींग की खपत हमारे देश में लगभग 40 प्रतिशत है. यह शायद थोड़ी अजीब भी है की जिस देश में हींग की खपत इतनी ज्यादा है उस देश में इसकी खेती नहीं होती और इसे दूसरे देश से आयात करना पड़ता है. वहीं हींग का बाजार भाव 35000 रुपए प्रति किलो ग्राम है.

इन देशों में होती है हींग की खेती

हिंग एक सौंफ प्रजाति का पौधा है और इसकी लम्बाई 1 से 1.5 मीटर तक होती है. इसकी खेती जिन देशों में प्रमुख तौर पर होती हैं वो है अफगानिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और ब्लूचिस्तान. कब और कहां कर सकते हैं

 

हींग की खेती

 

अजवाइन की खेती

यह धनिया कुल (आबेलीफेरा) की एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है। इसका वानस्पतिक नाम टेकिस्पर्मम एम्मी है तथा अंग्रेजी में यह बिशप्स वीड के नाम से जाना जाता है। इसके बीजों में 2.5-4% तक वाष्पशील तेल पाया जाता है।अजवाइन(celery seed )खजीज तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इसमें 8.9% नमी, 15.4% प्रोटीन, 18.1% वसा, 11.9% रेशा, 38.6% कार्बोहाइड्रेट, 7.1% खनिज पदार्थ, 1.42% कैल्शियम एवं 0.30% फास्फोरस होता हैं। प्रति 100 ग्राम अजवाइन से 14. 6मी.ग्रा. लोहा तथा 379 केलोरिज मिलती हैं।

 

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