Organic Farming

हींग की खेती

हींग की खपत हमारे देश में लगभग 40 प्रतिशत है. यह शायद थोड़ी अजीब भी है की जिस देश में हींग की खपत इतनी ज्यादा है उस देश में इसकी खेती नहीं होती और इसे दूसरे देश से आयात करना पड़ता है. वहीं हींग का बाजार भाव 35000 रुपए प्रति किलो ग्राम है.

इन देशों में होती है हींग की खेती

हिंग एक सौंफ प्रजाति का पौधा है और इसकी लम्बाई 1 से 1.5 मीटर तक होती है. इसकी खेती जिन देशों में प्रमुख तौर पर होती हैं वो है अफगानिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और ब्लूचिस्तान. कब और कहां कर सकते हैं

 

हींग की खेती

 

अजवाइन की खेती

यह धनिया कुल (आबेलीफेरा) की एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है। इसका वानस्पतिक नाम टेकिस्पर्मम एम्मी है तथा अंग्रेजी में यह बिशप्स वीड के नाम से जाना जाता है। इसके बीजों में 2.5-4% तक वाष्पशील तेल पाया जाता है।अजवाइन(celery seed )खजीज तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इसमें 8.9% नमी, 15.4% प्रोटीन, 18.1% वसा, 11.9% रेशा, 38.6% कार्बोहाइड्रेट, 7.1% खनिज पदार्थ, 1.42% कैल्शियम एवं 0.30% फास्फोरस होता हैं। प्रति 100 ग्राम अजवाइन से 14. 6मी.ग्रा. लोहा तथा 379 केलोरिज मिलती हैं।

 

तंबाकू की खेती

किसानों के लिए नकदी फसलें कम लागत व कम समय में ज्यादा लाभ देने वाली मानी जाती हैं. नकदी फसलों की प्रोसेसिंग व मार्केटिंग के बारे में जानकारी ले कर किसान अच्छा फायदा ले सकते हैं. इन्हीं नकदी फसलों में तंबाकू की खेती खास है. तंबाकू की खेती न केवल कम समय में की जाती है, बल्कि इस के मामले में किसानों को मार्केटिंग के लिए इधरउधर भटकना नहीं पड़ता है. तंबाकू की फसल की कटाई व प्रोसेसिंग के बाद किसान के खेत से ही फसल की बिक्री आसानी से हो जाती है. भारत में तंबाकू की कई किस्में उगाई जाती हैं. किन किस्मों को उगाना है, यह उस के अलगअलग इस्तेमाल पर निर्भर करता है.

भारतीय कृषि - समस्या और समाधान

"भारत एक कृषि प्रधान देश है "  अक्सर कृषि लेखों (Essays on Agriculture) की शुरुआत इसी वाक्य से होती है. ग्रंथों में कहा गया है  "अन्नम वै प्राणिनां प्राणः "( अन्न प्राणियों का जीवन है अर्थात प्राण है।  प्राण ही जीवन एवं जीवन ही प्राण होता है।  प्राण नहीं तो जीवन नहीं। ) और हमसब इस तथ्य से भली भांति परिचित हैं। अन्न को उगाने की कला का नाम ही कृषि है. कृषि एक विज्ञान है जिसमे फसल को उगाने से लेकर उसके बाज़ारीकरण तक का सूक्ष्म ज्ञान निहित है.

चने की खेती के लिए किसान अपनाए रेज्ड-बेज्ड पद्धति

अल्पवर्षा के कारण किसानों को खेती करने की नई पद्धतियों के साथ खेती करने का मन बनाना होगा। समय रहते किसान भू-जल स्तर, बारिश के पानी प्रदाय की स्थित को ध्यान में रखते हुए रबी की फसल के लिए अहम निर्णय लेना होगा। अल्पवर्षा और सूखे जैसी स्थिति से निपटने किसानों को चने की खेती के लिए रेज्ड-बेज्ड पद्धति से खेती करना होगा। गेहूं की फसल के लिए कम पानी वाली किस्म का चयन करना होगा। 

कम रकबे से मवेशियों के चारे का संकट 

अखरोट की खेती

अखरोट (जुगलांस प्रजातियाँ) देश का अति महत्वपूर्ण शीतोष्ण फल है। अखरोट उत्तराखण्ड का एक महत्वपूर्ण फल है जो कि केवल मुख्यतः पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाता हैं। अखरोट में मौजूद ओमेगा-3 व 6 फैटी अम्ल एवं 60 प्रतिशत तेल की मात्रा होने की वजह से यह पोष्टिक, औषधीय एवं औद्योगिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर कम करने के साथ-साथ रक्त वाहनियों की क्रियाओं के सुचारू संचालन तथा मैमोरी बढ़ाने में भी सहायक होता है।भारत में अखरोट अलग-अलग आकारों एवं आकृतियों के पाए जाते हैं। भारतीय अखरोटों की चार श्रेणियाँ अर्थात कागज़ी खोलदार, पतला-खोलदार, मध्यम खोलदार, सख्त खोलदार अखरोट है। अख

बादाम की खेती

बादाम हालांकि एक मेवा होता है, किन्तु तकनीकी दृष्टि से यह बादाम के पेड़ के फल का बीज होता है। बादाम का पेड़ एक मध्यम आकार का पेड़ होता है और जिसमें गुलाबी और सफेद रंग के सुगंधित फूल लगते हैं। ये पेड़ पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके तने मोटे होते हैं। इसके पत्ते लम्बे, चौड़े और मुलायम होते हैं। इसके फल के अन्दर की मिंगी को बादाम कहते हैं। बादाम के पेड़ एशिया में ईरान, ईराक, मक्का, मदीना, मस्कट, शीराज आदि स्थानों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इसके फल वानस्पतिक रूप से अष्ठिफल के रूप में जाने जाते हैं और उनमें एक बाह्य छिलका होता है तथा एक कठोर छाल के साथ अंदर एक

अमरूद की खेती

भूमि

अमरूद को लगभग प्रत्येक प्रकार की मृदा में उगाया जा सकता है परंतु अच्छे उत्पादन के लिये उपजाऊ बलुई दोमट भूमि अच्छी पाई गई है यद्यपि अमरूद की खेती 4.5 से 9.0 पी.एच.मान वाली मिट्टी में की जा सकती है परंतु 7.5 पी.एच.मान से ऊपर वाली मृदा में उकठा (विल्ट) रोग के प्रकोप की संभावना अधिक होती है।

 

उन्नत किस्में

ललित, इलाहाबाद, सफेदा, लखनऊ-49, अर्का मृदुला, चित्तीदार, ग्वालियर-27, एपिल कलर,बेदाना, लाल गूदे वाली किस्म, धारीदार आदि।

 

संकर किस्में

सोयाबीन में लगने वाले कीट एवं रोगों की पहचान तथा उपचार

सोयाबीन विश्व की सबसे महत्वपूर्ण तिलहनी व ग्रंथिफुल फसल हें. यह एक बहूद्धेशीय व एक वर्षीय पोधे की फसल हें. यह भारत की नंबर वन तिलहनी फसल हें सोयाबीन का वानस्पतिक नाम गलाइसीन मैक्स हे इसका कुल लेग्युमिनेसी के रूप में बहुत कम उपयोग किया जाता हें. सोयाबीन का उद्गम स्थान अमेरिका हें इसका उत्पादन चीन, भारत आदि देश में हें. सोयाबीन की खेती सम्पूर्ण भारत में की जाती हें लेकिन देश में प्रथम मध्य्प्रधेश दूसरा महाराष्ट्र तीसरा राजस्थान राज्य हें।

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