संतरा फसल प्रबंधन एवं उत्पादन

भारत मे संतरा मुख्य रुप से महाराष्ट्र  के नागपुर यवतमाल वर्धा बुलढाना एवं विदर्भ को लगके छिन्दवाडा जिले के पांढूरना सौसर तहसील मे संतरे की फसल ली जाती है एवं देष मे पंजाब हरीयाणा राजस्थान मे भी संतरे का उत्पादन लिया जाता है।
संतरे की प्रजातियां 
  मुख्य रुप से हमारे देश मे नागपुरी संतरा तथा किन्नो जाती के संतरे की फसल ली जाती है।
 
 नागपुरी संतरा 
   इसका आकार गोल चमकदार पकने पर नारंगी एवं भरपुर रसदार होता है।
           परिपक्व संतरे का व्यास 6सेमी से 8सेमी. तक होता है संतरा छिलने के बाद एक विषेष प्रकार की सुगंध आती है
      इसी गुण के कारण संतरा देश मे ही नही विदेशों मे भी प्रसिद्ध है।

किन्नो संतरा 
     मुख्य रुप से पंजाब हरीयाणा राज्य मे इसकी फसल ली जाती है। फल का वजन 225 ग्राम तक होता है।
     फल का रंग आर्कषक एवं स्वाद मे नागपुरी संतरे से खट्टा होता है इसकी छाल मोटी होने दुर के मार्केट मे भेजने के लिए उत्तम होता है।

खेत की तैयारी 
    पौधे लगाने के लिए गहरी काली मिट्टी या रेत मिश्रीत वालुकामय खेत संतरे के लिए अच्छा होता है।
          पौधे लगाने के लिए के लिए ग्रिष्म काल मे एक माह पहले भरी जमीन पर 18×18 हल्की जमीन पर 15×15 फीट पर मार्क करके 1.5 ×1.5 ×1.5 इंच के गड्ढे खोद कर उसे एक माह तक वैसे ही छोड दे जिससे धुप मे हानिकारक किट मर जाए उसके पश्चात् 40  किलो सडी गोबर की खाद या उपजाउ मीट्टी ५ किलो नीम की सडी खाद 1 किलो सुपर फास्फेट एवं 50 ग्राम कीटनाशक पाउडर के मिश्रन से गड्ढे भर देते है। पौधे लगाते समय  जमीन से 3 इंच पौधे की आंख रहे इस बात का ध्यान रखे हमारे देश मे पौधे जुन से दिसम्बर तक लगाये जाते है।
सिचाई निदाई गुडाई 
    पौधे लगाने के बाद पौधेा केा पानी देना चाहीए। एक माह तक आवश्यकतानुसार पानी दे पौधे के लिए सबसे अच्छी विधी टपक सिचाई है। हमारे क्षेत्र मे अधिकांश बगीचे टपक सिचाई से सिंचीत होते है। एक वर्ष से बडे पौधे को ठंड के मौसम मे 15 दिन मे एवं ग्रीष्मकाल मे 5 से 8 दिन मे सिचाई करना चाहिए। खेत मे बरसात का पानी संचय ना हो इसका ध्यान रखना चाहिए
पौधेा को आकार देना 
          पौधे को प्रारंभीक अवस्था मे उचित आकार देने के लिए उसकी कटिंग करना आवश्यक है जमीन से 1.5 
          फिट से ३ -४  टहनियां रखनी चाहिए नीचे कि काटे वाली टहनियां  हमेशा निकालते रहना चाहिए।
खाद एंव उर्वरक 
  अच्छी फसल लेने के लिए बगीचो को समय पर खाद एवं उर्वरक देना चाहिए जिसमे गोबर की खाद प्रति एकड़  40 किलो तक देना चाहिए साथ मे नीम कि खली 3 से 5 किलो  तक देना चाहिए एवं 600 ग्राम नाइट्रोजन एव 400 ग्राम फास्फेट 400 ग्राम पोटाश वर्ष मे इसे 3 बार देना चाहिए एवं सुक्ष्म पोषक तत्व 250 ग्राम तक देकने चाहिए संतरे मे ताजे गोबर को  200 ली. के ड्रम 
  60 किलो गाय का गोबर 500 ग्राम रायजोबियम 500 ग्राम   1 किलो  ट्राईकोडर्मा 2 किलो गुड एवं 2 किलो सायाबीन,  चना, उडद, ज्वार का आटा 4 दिन सडाने के बाद सिंचाईके वक्त देने से अच्छे नतीजे दिखते है। यह वर्ष मे 2 से 3 बार एक एकड मे देना चाहिए । वर्ष मे 2 बार बोर्डा पेस्ट लगाना चाहिए या 20 ग्राम कॅापर आक्सीफलोराईड के साथ 30 नुवान 10 ली. पानी मिलाके तने पर छिडकाव करना चाहिए जिससे किडे नही लगते।
बहार पकडना 
संतरे को 3 बहार मुख्य रुप से आती है।
     जुलाई से अगस्त ‘मृग‘ सितंबर से अक्टुंबर ‘हस्त‘ फरवरी से मार्च ‘अंबिया‘ हमारे देशमे मृग मे जिनके 
           पास सिचाई कि व्यवस्था है वह अंबियां बाहार लेते है। बाहार लेने के लिऐ पौधे 5 से 7 साल मे उत्पादन लेने लायक हो जाते है।बहार लेने के लिए पौधो को 1 से 1.5 माह तक आराम की जरूरत होती है। आराम का मतलब कोनसे मौसम मे फसल लेनी है उस हिसाब से पौधे को 1 से 1.5 माह पहले पानी देना बंद कर देते है। जिससे पौधे मे फसल देने वाली टहनियो मे अन्न का संचय हो जाता है एवं उस पर फुल आने लगते है। पौधे मे फुल दिखने के बाद   प्लानोफिक्स13.00.45  उर्वरक 20 ग्राम कार्बेन्डाजीम 20 ग्राम का घोल 10 लिटर पानी मे बनाकर धिडकान करना चाहिए जिससे फुल नही गिरते।

 प्रमुख किट एवं रोग लक्षण तथा उपाय
    संतरे पर सफेद मख्खी, काली मख्खी, माहु, सिट्स सिल्ला, लिफ माइनर, फल  माईटस तने का कीडा, निमेटोडस, कैंकर फाइटोप्थोरा, डायबैक, गोमोसीस एवं 
सफेद मख्खीश्
यह हलके पिले रंग की होती है एवं पत्तो का रस चुसती है।
काली मख्खीश्
 यह पत्तो का रस चुसती है एवं समय पर नियंत्रन नही किया तो पौधे कि सभी टहनिया काली हो जाती है हमारें देश मे इसे कोलसी कहते है।
सिट्स सिल्लाश्
 यह नयी कोमल पत्तो का रस चुसती हैएवं एक मिठा द्रव छोडती है जिससे फुफुंद उत्पन्न होती है।
व    लिंफ माइनरश्
यह छोटा किट होता है जो पत्तियो मे सुरंग बनाकर रहता है।
उपाचार
उपरोक्त कीटों का समय पर नियंत्रण करना जरूरी है।
 इसके लिए मोनोक्रोटोफॅास 30मि.ली. या ट्रायजोफास 30 मि.ली. या एसीफेट 30 ग्राम या टाटामिडा 10 मि ली. पानी मे घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए ।
फल किडाश्
 यह पके फलो मे सुंड से छेद करते है जिससे फल पिले होकर गिर जाते है जिससे नुकसान होता है ।
उपाचार
डायक्लोरोवास या नुवान 30 मि.ली. पानी के समय छिडकान करना चाहिए एवं खेतो मे धुवा करना चाहिए  बाजार मे फल मख्खी के लिए ट्राप आते है वह लगाने चाहिए बगीचा खरपतवार मुक्त रखना चाहिए।
डायबैकश्
षुरूवात मे पौधे के पत्ते पिले पड जाते है एवं टहनिया उपर से सुखती है ।समय पर उपचार नही किया तो पौधा पुरा सुख जाता है।
उपाचार
 पौधे की सुखी टहनिया काट लेनी चाहिए एवं कापरआक्सीक्लोराइड या रेडोमिल का छिडकाव करना चाहिए मथा रोगग्रस्त पौधे कि जडे खुली करके उपरोक्त दवा पानी मे मिलाकर डालनी चाहिए।
गमोसिस 
यह तने मे जख्म, अन्नद्रव कि कमतरता जिवाणुश्विषाणु से यह रोग होता है जिससे तना फट जाता है एवं एक चिपचीपा द्रव रिसता है। जिससे पौधा कमजोर होता है। 
उपचार
पौधे तने मे जखम से द्रव का रिसाव देखते हि साफ करिके एरंडी के तेल मे रेडोमील या बवब का मलहम लगाने से रिसाव बंद  हो जाता है पौधे को वर्ष मे 2 बार बोर्डा पेस्ट लगाना चाहिए। 
कैंकर 
 श्यानक रोग का प्रकोप फल एवं पत्तियो मे दिखाई देता है षुरूवात मे पत्तो के निचले भाग मे लक्षण प्रगट होते है जिससे पिले भुरे रंग के धब्बे दिखाई देते है जिससे पत्तीया पिली पड कर गिर जाती है। फल धब्बे खुरदरे भुरे रंग के छिलके  की गहराई तक होते है जिससे छिलके फट जाते है
उपाचार
बरसात मे कार्बेन्डाजीम 2 ग्राम प्रती ली. पानी मे घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए एवं बवब 3 ग्राम स्ट्टोसाइक्सीन 1 ग्राम 10 ली.पानी मे घोल बनाकर आवश्यकतानुसार छिडकाव करना चाहिए। 
फलो को तोडना 
 संतरे 6 से 8 माह मे पक्व हो जाते है । प्रति पौधा अच्छी तरह बगीचे की देखभाल कि जाए तो 250 से 1500 फल प्रति पौधा उत्पादन मिलता है।
 संतरा  पौधे कि उपलब्धता 
संतरे के पौधे हमारे क्षेत्र मे जुन से सितम्बर तक उपलब्ध रहते है संतरे पौधे की मंडी के रूप मे महाराष्ट्रा मे षेंदुरदना घाट तह. वरूड जि. अमरावती से हर साल दुसरे प्रदेशों मे लाखो पौधे किसान ले जाते है या हमसे संपर्क करने पर उत्तम दर्जे के पौधे उपलब्ध कराने मे हम मदद कर सकते है।
 
रेवानन्द निकाजु
मु. वो. वाडेगाव तह. पांढुरना
जि. छिन्दवाड मो. न. 09977063179
लेखक एक उन्नतशील किसान हैं 

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