Organic Farming

अलसी की खेती

अलसी बहुमूल्य औद्योगिक तिलहन फसल है। अलसी की खली दूध देने वाले जानवरों के लिये पशु आहार के रूप में उपयोग की जाती है तथा खली में विभिन्न पौध पौषक तत्वो की उचित मात्रा होने के कारण इसका उपयोग खाद के रूप में किया जाता है। 

सूक्ष्म जीवों से पा सकते हैं कीटों और रोगों से छुटकारा

 ज्यादा उत्पादन की चाह में अत्याधिक रसायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। किसान अब यह अनुभव करने लगा है कि रासायनिक कीटनाशक अब उन्हीं शत्रु कीटों पर बेअसर हो रहे है, जिनपर वो रसायन प्रयोग कर पहले छुटकारा पा जाते थे।

ऐसे में प्रकृति में बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जैसे विषाणु ,जीवाणु एवं फफूंद आदि हैं जो शत्रु कीटों में रोग उत्पन्न कर उन्हें नष्ट कर देते है, इन्ही विषाणु, जीवाणु, एवं फफूंद आदि को वैज्ञानिकों ने पहचान कर प्रयोगशाला में इन का बहुगुणन किया तथा प्रयोग हेतु उपलब्ध करा रहे हैं, जिनका प्रयोग कर किसान लाभ ले सकते हैं।

चना की उन्नत खेती

चना  भारत की सबसे महत्वपूर्ण दलहनी फसल है। चने को दालों का राजा कहा जाता है। पोषक मान की दृष्टि से चने के 100 ग्राम दाने में औसतन 11 ग्राम पानी, 21.1 ग्राम प्रोटीन, 4.5 ग्रा. वसा, 61.5 ग्रा. कार्बोहाइड्रेट, 149 मिग्रा. कैल्सियम, 7.2 मिग्रा. लोहा, 0.14 मिग्रा. राइबोफ्लेविन तथा 2.3 मिग्रा.

सहफसली खेती से सुधरेगी मिट्टी की सेहत

सहफसली खेती से सुधर रही मिट्टी की सेहत
मिट्टी की उर्वरा शक्ति  और उत्पादन में चोली-दामन का संबंध है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति के अनुसार ही उसकी उत्पादन क्षमता प्रभवित होती है। अगर खेतों में सहफसली कृषि की जाए तो मिट्टी की सेहत के साथ-साथ उत्पादन भी बेहतर हो जाता है।

स्टिकी ट्रैप

किसान घातक कीटनाशकों के छिड़काव के बिना कीटों से अपनी फसल की रक्षा कर सकेंगे। रासायनिक दवाओं से कीट नियंत्रण में कई तरह की दिक्कत आती हैं, जिसमें कृषि पर्यावरण को कई तरह के नुकसान शामिल रहते हैं। जबकि स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से किसान इन सभी दिक्कतों से बच सकता है। रासायनिक कीटनाशकों के लगातार इस्तेमाल से कई गंभीर खतरे पैदा होतेे रहते हैं। रसायन के ज्यादा इस्तेमाल से कीटों में रसायन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, खाद्य शृंखला में कीटनाशक अवशेष, मृदा प्रदूषण, मित्र कीटों का अनचाहा नुकसान और पर्यावरण को कई अन्य नुकसान भी होते हैं।बार बार रासायनिक कीटनाशको के प्रयोग के उपरांत भी कपास, मूंगफली, धान

कृषि और खाद्य उत्पादकता में बहुत सहयोग करती हैं मधुमक्खियां

मधुमक्खी कीट वर्ग का प्राणी है। मधुमक्खी से मधु प्राप्त होता है जो अत्यन्त पौष्टिक भोजन है। यह संघ बनाकर रहती हैं। प्रत्येक संघ में एक रानी, कई सौ नर और शेष श्रमिक होते हैं। मधुमक्खियाँ छत्ते बनाकर रहती हैं। इनका यह घोसला (छत्ता) मोम से बनता है।

वानस्पतिक रसायन एवं उनका प्रयोग

वानस्पतिक रसायनों से कीट नियंत्रण
वातावरण में बढ़ते प्रदूषण तथा कीटनाशकों के मूल्यों में भारी वृद्धि के कारण यह आवश्यक हो गया है कि कीटों के नियंत्रण हेतु वानस्पतिक नियंत्रण की विधियों को प्रयोग में लाया जाये। वानस्पतिक विधियों के प्रयोग से किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता। इस विधि से कीट नियंत्रण में खर्च कम आता है। इन विधियों में निम्न वनस्पतियों का प्रयोग किया जाता है।
1. नीम से कीट नियन्त्रण

एग्रो-केमिकल्स या कृषि रसायन क्या हैं?

एग्रो-केमिकल्स  या कृषि रसायन ऐसे उत्पादों की श्रेणी है जिसमें सभी कीटनाशक रसायन एवं रासायनिक उर्वरक शामिल होते हैं. यद्यपि ये सभी रसायन किसानों के लिए अत्यंत महंगे हैं फिर भी बेहतर उत्पादन हेतु इनका उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. यदि इनका उपयोग सही मात्रा एवं उपयुक्त विधि द्वारा किया जाए तो ये किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर प्रदान कर सकते हैं. रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग मिट्टी की प्रकृति और स्थानीय वातावरण पर निर्भर करता है.

Pages